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opposition-leader-meet-president-in-india-768x365नई दिल्ली। नोटबंदी पर संसद में मोदी सरकार के खिलाफ एकजुट विपक्ष में अब दरार पैदा होते दिख रही है। शुक्रवार को संसद में गतिरोध के बाद विपक्ष के नेताओं ने राष्ट्रपति भवन जाकर महामहिम राष्‍ट्रपति प्रणव मुखर्जी से मुलाकात की। इस मुलाकात में चार प्रमुख पार्टियां बसपा, सपा, वामदल और राष्‍ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शामिल ही नहीं हुईं।
विपक्ष ने शुक्रवार को नोटबंदी की लड़ाई को राष्ट्रपति के सामने पहुंचाने का मन बनाया। शुक्रवार दोपहर को विपक्षी दलों ने नोटबंदी और इसकी समस्याओं पर बहस नहीं कराने के मामले को राष्ट्रपति के सामने रखा। हालांकि विपक्षी दलों में उस समय दरार देखने को मिली जब बीएसपी, एसपी, एनसीपी और वामदल ने उनका साथ छोड़ दिया। यह चार पार्टियां विपक्ष के साथ राष्ट्रपति से मिलने नहीं पहुंचीं। राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि नोटबंदी की वजह से कितने लोग लाइन में लग कर मर गए हैं। कितने लोगों को तकलीफ हुई है। लोग बेरोजगार हुए हैं। मजदूर को मजदूरी भी नहीं मिल रही। किसानों को कठिनाई हुई है।
उन्होंने कहा कि हम इस मुद्दे पर संसद में चर्चा कराना चाहते थे, पर सरकार ने सत्र चलने ही नहीं दिया। खड़गे ने कहा, ‘हम इसपर चर्चा चाहते थे, पर सरकार ने इन्हें रोक दिया। सरकार ने सहयोग नहीं किया। सरकार ने लोकतंत्र के हर वसूलों को तोड़ा। सरकार ने सदन को ठीक ढंग से नहीं चलने दिया। हम बिना शर्त चर्चा के लिए तैयार थे।’
जेडीयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव ने कहा, ‘सरकार ने नोटबंदी, कालेधन के खिलाफ कदम उठाया है तो हम साथ खड़े हैं लेकिन देशभर में किसानों, गरीबों, मजदूरों का जो हाल हुआ है, सब्जीवालों की सब्जियां खेत में ही सड़ गईं। सरकार ने इसके लिए कुछ नहीं किया। सदन चलता तो बहुत सारे लोगों की दिक्कतों को उठाए होते पर सरकार ने ऐसा करने ही नहीं दिया। इसी वजह से हम आज राष्ट्रपति के पास आए।’

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