नई दिल्ली। अगर 2002 की सैम राइमी की ‘स्पाइडरमैन’ अभी भी आपके जहन में ताजा है तो हो सकता है कि ये नया वर्जन आपको बोरियत की हद तक जाना पहचाना लगे। इसकी कहानी की शुरुआत भी वहीं से होती है। पीटर पार्कर को एक कीड़ा काट लेता है। उसे अपनी शक्तियों के बारे में पता चलता है। वो सबसे पहले इसका इस्तेमाल स्कूल में उन लडक़ों पर करता है जो उसे परेशान करते हैं। फिर वो सडक़ों पर खतरनाक विलेन से लड़ता है और लोग उसे हैरानी से देखते हुए नजर आते हैं। करतब और करामातों के बावजूद फिल्म अच्छी बन पड़ी है। इसका श्रेय जाता है फिल्म की गहराई को जिसे निर्देशक मार्क वेब इसके खास सीन में लेकर आते हैं। या फिर इसके मुख्य किरदार एंड्रयू गारफील्ड फिल्म को नयापन देते हैं। अपनी चमत्कारी अदाकारी से वो परेशान पीटर पार्कर के किरदार को बखूबी निभाते हैं जिसे अपने दोस्तों से ज्यादा अपने स्केट बोर्ड पसंद हैं। फिल्म इसलिए भी ज्यादा अच्छी है क्योंकि फिल्म में सेट से ज्यादा फिल्म के किरदारों पर ध्यान दिया है। पार्कर की क्लासमेट और उसकी प्रेमिका ऐमा का किरदार निभाया है ग्वेन स्टेसी ने। फिल्म की कहानी आज की कहानी लगती है। फिल्म के एक्शन सीन उन मॉडर्न सुपरहीरो फिल्मों के मुकाबले कुछ कम लगते हैं जो हम द एवेंजर जैसी फिल्मों में देखते आए हैं। वेब हमें एक ऐसा सुपर हीरो देते हैं जिसकी हम परवाह करते हैं। फिल्म में कुछ कमियां भी हैं जैसे इसकी साधारण स्टोरी लाइन, करीब 138 मिनट लंबाई, इरफान खान का छोटा सा रोल और इसका जबरदस्ती का 3ष्ठ। स्पाइडरमैन की कहानी पूरी तरह से इसके मुख्य किरदारों के रोमांस पर टिकी हुई है। अकेले गारफील्ड और स्टोन इस फिल्म को देखने लायक बनाते हैं।

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