IIT Entrance 2012आईआईटी की प्रवेश परीक्षा में बैठने के लिए सीबीएसई में 78 फीसदी यूपी बोर्ड में 65 फीसदी तथा तमिलनाडु बोर्ड में न्यूनतम 78 फीसदी अंक की अनिवार्यता लागू

नई दिल्ली। आईआईटी में दाखिले के लिए होने वाले टेस्ट को लेकर सरकार और आईआईटी काउंसिल के बीच विवाद सुलझ गया है। नए फॉर्मूले को लेकर आईआईटी जेईई (संयुक्त प्रवेश परीक्षा) में बैठने के लिए सीबीएसई की परीक्षा में 78 फीसदी अंक लाना अनिवार्य कर दिया गया है।

यूपी बोर्ड के लिए न्यूनतम 65 फीसदी तथा तमिलनाडु बोर्ड के लिए न्यूनतम 78 फीसदी अंक की अनिवार्यता लागू कर दी गई है। पहले हर बोर्ड के लिए न्यूनतम 60 फीसदी अंक ही जरूरी थे। आज दिल्ली में हुई आईआईटी काउंसिल की बैठक में ये फॉर्मूला तय किया गया। नई व्यवस्था 2013 से लागू होगी।

नई व्यवस्था के मुताबिक आईआईटी में प्रवेश के लिए करीब डेढ़ लाख छात्रों का एक एडवांस टेस्ट होगा। इस टेस्ट में वही छात्र बैठ पाएंगे जो अपने-अपने बोर्ड के टॉप-20 परसेंटाइल होंगे। परसेंटाइल से तात्पर्य है कि अगर किसी बोर्ड के टॉपर ने 98 फीसदी नंबर पाए हैं तो उससे 20 फीसदी कम यानी कि करीब 78 फीसदी तक अंक पाने वाले छात्र इस एडवांस टेस्ट में बैठ पाएंगे। एडवांस टेस्ट की मेरिट लिस्ट से आईआईटी में छात्रों को प्रवेश दिया जाएगा।

अभी तक कुछ बोर्ड को ये शिकायत रहती थी कि आईआईटी प्रवेश परीक्षा में सीबीएसई के छात्र बाजी मार ले जाते हैं क्योंकि सीबीएसई के छात्रों को बोर्ड के छात्रों के मुकाबले 12 की परीक्षा में ज्यादा नंबर प्राप्त होते हैं। नई व्यवस्था के तहत सभी छात्रों को एक जैसे अवसर उपलब्ध कराने की कोशिश की गई है। यूपी बोर्ड का छात्र जहां 65 फीसदी अंक लाकर ही एडवांस टेस्ट में बैठ सकेगा वहीं सीबीएसई के छात्र को 78 फीसदी अंक लाने होंगे।

बैठक की अध्यक्षता मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल को करनी थी लेकिन वे इसमें नहीं पहुंचे। उन्होंने एक संदेश बैठक के लिए भिजवाया जिसमें कहा कि हमारी जिम्मेदारी है कि हम छात्रों से परीक्षा का तनाव कम करें और पूरे देश के बच्चों के बारे में सोचें।

बैठक के बाद सिब्बल ने कहा कि मैं आईआईटी काउंसिल का आभारी हूं, अभी बहुत लंबा सफर तय करना है। मुझे पूरा भरोसा है कि सभी लोग मिलकर चार उद्देश्यों के लिए काम करेंगे। ये चार उद्देश्य हैं कोचिंग को कम करना, स्कूल परीक्षा का महत्व बढ़ाना, टेस्ट की संख्या कम करना और कैपिटेशन फीस खत्म करना। काउंसिल का आज का फैसला इस दिशा में एक कदम है|

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