इसे हार का भय कहें या अस्तित्व का खतरा। बात जो भी हो, सैकड़ों छोटे दलों ने निकाय चुनाव से किनारा कर लिया है। जिसे लेकर इन दलों से जुड़े कायकर्ताओं में निराशा है। उन्हें जनता के बीच जाने पर इसका जवाब देना पड़ रहा है।
निकाय चुनाव के चर्चा में आते ही उम्मीद लगाई जा रही थी कि विधानसभा चुनाव की तरह इस चुनाव में भी छोटे दलों की उछल-कूद देखने को मिलेगी। इन दलों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने भी अपने-अपने वार्डों से पार्षद पद पर चुनाव लडऩे की तैयारी शुरू की थी लेकिन निकाय चुनाव की नामांकन प्रक्रिया समाप्त हो गई। न अमर सिंह का लोकमंच नजर आ रहा है न कल्याण सिंह की राष्टï्रवादी जनक्रांति पार्टी। इसके अतिरिक्त अन्य छोटे दल भी चुनावी मैदान से बिना लड़े ही बाहर हो गये। सिर्फ  अपना दल और पीस पार्टी ने ही थोड़ी बहुत हिम्मत दिखाई है। इंडियन जस्टिस पार्टी ने निकाय चुनाव में कोई प्रत्याशी नहीं उतारा है। इस सम्बन्ध में राजनीतिज्ञों का कहना है कि छोटे दलों पर क्षेत्रीय दल होने का तमगा जरूर लगता है पर जब विश्वास की बात आती है तो निकाय जैसे क्षेत्रीय चुनाव में भी जनता का विश्वास राष्ट्रीय पार्टियों पर अधिक होता है। यही वजह है कि छोटे दल इस चुनाव में पार्टी प्रत्याशी उतार कर किसी तरह का खतरा मोल नहीं लेना चाहते हैं। इन्हें डर है कि निकाय चुनाव में यदि प्रत्याशी लड़ाएं और जीत न हुई तो पार्टी का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। जबकि विधानसभा चुनाव में बात अलग होती है। नेता का कद देखा जाता है। लेकिन अमर सिंह और कल्याण सिंह की पार्टी से जुड़े लोगों में इस बात की निराशा है कि पार्टी ने नगर निकाय चुनाव में ताल क्यों नहीं ठोंकी। आखिर पार्टी के संस्थापक दोनों ही कद्दावर नेता हैं। कल्याण सिंह जहां उप्र के मुख्यमंत्री रह चुके हैं तो अमर सिंह सत्तारूढ़ गठबंधन के खेवनहार की भूमिका में कभी नजर आए थे। इसके बावजूद निकाय चुनाव में शांत रहे। कई कार्यकर्ताओं ने मेयर और पार्षद का चुनाव लडऩे का मन बना रखा था लेकिन अब उनके पास निर्दल चुनाव लडऩे के शिवा कोई रास्ता नहीं है। विधानसभा चुनाव में मिली हार भी इन दलों को भयभीत कर गई है और अस्तित्व को बचाये रखने के लिए ही निकाय चुनाव से किनारा कर लिया है।

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इन दलों ने नहीं उतारे प्रत्याशी
-राष्ट्रवादी जनक्रांति पार्टी
-लोकमंच
-तृणमूल कांग्रेस
-महान दल
-राष्ट्रीय समानता दल
-वंचित समाज इंसाफ पार्टी
-राष्ट्रीय स्वाभिमान पार्टी
-बृज क्रांति दल
-भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
-माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पाटी
-लव पार्टी
विधानसभा चुनाव की तरह मतदाताओं को घर से निकाल कर पोलिंग बूथ तक ले जाने की तैयारी है। इसके लिए जिला प्रशासन मतदाताओं को जागरूक करेगा। इस आशय के राज्य निर्वाचन आयोग स्था. निकाय एवं पंचायत के निर्देश के बाद मतदाता जागरुकता कार्यक्रम चलाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। जिसे प्रचार-प्रसार, होर्डिंग्स, बैनर और न्यूज पेपर के जरिए चलाया जाएगा।

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