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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रम व्यवस्था में कानून के नियम बड़ा बदलाव करने की योजना कर रही है, जिससे कंपनियों के द्वारा कर्मचारियों की नियुक्ति और छंटनी करना आसान हो जाएगा। श्रम मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि इस नए कदम से लाखों नई नौकरियां पैदा होंगी।

साल 2014 में सत्ता संभालने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सुधार एजेंडे के जरिए भारत के श्रम व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने की कोशिश की थी। लेकिन बाद ट्रेड यूनियनों और सुधार से जुड़े अन्य विधेयकों की वजह से उस वक्त यह नहीं किया गया था।

श्रम मंत्रालय के सचिव ‘शंकर अग्रवाल’ ने बताया कि अगस्त में देश के सबसे बड़े टैक्साइड सुधार उत्पाद व सेवा कर (जी एस टी) के संसद से पास होने के बाद सरकार को लगता है कि यही सही वक्त है। जब श्रम सुधारों को फिर से प्राथमिकता दी जाए।

एक इन्टरव्युव में शंकर अग्रवाल ने कहा कि हमें कानून में सुधार करना होगा। नौकरियों के लिए नियुक्ति करने के मामले में कंपनियां और नियोक्ताएं लचीलापन चाहते हैं। उन्होने ये भी कहा कि औद्योगिक सम्बंध और मजदूरी से जुड़े दो अहम विधेयकों को इस महीने कैबिनेट के पास भेजा जाएगा। कैबिनेट से इन्हें मंजूरी मिल जाती है, तो नवंबर से शुरू हो रहे संसद अगले सत्र में इन्हें पेश किया जाएगा। इस शिकायत को ध्यान में रखते हुए नए कानून में अब इन प्रतिबंधों में छूट दी जा सकती है। शंकर अग्रवाल ने कहा, ‘यह प्राथमिकता तय करने का सवाल है।

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