लखनऊ –  कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा हटने के बाद, अब यह अफवाह फैल रही है कि अमित शाह कश्मीर के अनुच्छेद 370 की तरह अनुच्छेद 371 भी खत्म करने वाले हैं। अनुच्छेद 370 में संशोधन के बाद एक्टिविस्ट और विपक्ष का यह कहना था कि भाजपा तानाशाही कर रही है जिस तरह से उसने कश्मीर से उसका अधिकार व पहचान चुटकी भर में छीन लिया, उसी तरह यह सरकार नागालैंड, अरुणांचल प्रदेश व उत्तराखंड से भी विशेष राज्य का दर्जा छीन सकती है।

क्या है अनुच्छेद 371 – पूर्वोत्तर सहित देश के करीब 11 राज्यों में अनुच्छेद 371 के विभिन्न प्रावधान लागू है।  महाराष्ट्र और गुजरात, दोनों राज्यों के राज्यपाल को आर्टिकल-371 के तहत ये विशेष अधिकार है कि वे महाराष्ट्र के विदर्भ, मराठवाड़ा और गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ के अलग विकास बोर्ड बना सकते हैं। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में  371डी लागू है। मणिपुर में 27 वें संविधान संशोधन एक्ट के तहत लागू 371C में व्यवस्था है कि राष्ट्रपति चाहें तो राज्य के राज्यपाल को विशेष जिम्मेदारी देकर चुने गए प्रतिनिधियों की कमेटी बनवा सकते हैं।

मिजो समुदाय की परंपराओं, शासकीय, नागरिक और आपराधिक न्याय संबंधी नियमों को भारत सरकार की संसद नहीं बदल सकती। नगालैंड में 371ए  लागू है। इसमें भी व्यवस्था है कि जमीन के मालिकाना हक को लेकर नगा समुदाय के पारंपरिक प्रथाओं, शासकीय, नागरिक और आपराधिक न्याय संबंधी नियमों को संसद बदल नहीं सकती।  इसी तरह अरुणांचल प्रदेश में 371 एच, असम में 371 बी और सिक्किम में 371 एफ लागू है।

अनुच्छेद 371 पर अमित शाह का क्या है स्टैंड – गृह मंत्री अमित शाह ने साफ- साफ कहा अनुच्छेद 370 और 371 के बीच काफी फर्क है। केंद्र सरकार अनुच्छेद 371 को कभी नहीं टच करेगी। अमित शाह ने कहा कि 370 की तरह अनुच्छेद 371 राज्यों में अलगाववाद को बढ़ावा नहीं देता। अमित शाह ने यह भी तर्क दिया कि 371 ए के तहत नागालैंड के नागाओं की धार्मिक, सामाजिक प्रथाओं, भूमि और संसाधनों आदि के स्वामित्व के लिए वहां की असेंबली निर्णय करती है। यह अनुच्छेद देश की एकता और अखंडता की राह में बाधक नहीं है। अमित शाह के मुताबिक, 370 और 371 की तुलना करने का मतलब देश को गुमराह करना है।

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