कांग्रेस पार्टी अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है और पार्टी के साथ कुछ भी अच्छा होता नहीं दिख रहा है। जहां दिल्ली में कांग्रेस अपनी रणनीति को लेकर असमंजस में है, तो वहीं मध्यप्रदेश कांग्रेस में एक नया घमासान देखने को मिल रहा है।

मध्यप्रदेश में कांग्रेस के नए अध्यक्ष के चुनाव से पहले पार्टी में घमासान नजर आ रहा है। कई नेताओं के नाम इस पद के लिए आगे आ रहे हैं। मध्य प्रदेश दतिया जिले के कांग्रेस नेता अशोक दांगी ने कहा है कि यदि ज्योतिरादित्य सिंधिया को अध्यक्ष नहीं बनाया गया तो वह 500 कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ सामूहिक इस्तीफे दे देंगे। इन सबके बीच मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 10 जनपथ पहुंचकर सोनिया गांधी से मुलाकात की।

मीडिया से बात करते हुए दांगी ने कहा, ‘जिन कार्यकर्ताओं में इस्तीफे की पेशकश की है उन्हें अपनी पार्टी के सामने अपनी बात रखने का अधिकार है। उसी अधिकार के तहत मैं भी मांग करता हूं कि सिंधिया जी को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया जाय। मैं पार्टी हाईकमान और सोनिया जी, राहुल जी से मांग करते हैं। मैं और मुरैना के सभी वरिष्ठ से लेकर कनिष्ठ तक कार्यकर्ता इस्तीफे की पेशकश करेंगे।’

अशोक दांगी ने इस बावत एक पत्र भी लिखा है जिसमें कहा गया है, ‘यदि मध्य प्रदेश की राजनीति से सिंधिया जी को दूर किया गया तो पांच सौ लोगों के साथ दूंगा कांग्रेस से इस्तीफा- अशोग दांगी बगदा।’

दरअसल कमलनाथ ने जब से कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया है तभी से यह पद खाली है। कमलनाथ ने सोनिया गांधी से मुलाकात करने के बाद कहा, ‘मैं विभिन्न प्रदेशों का महामंत्री रहा हूं। अन्य प्रदेशों के बारे में भी चर्चा हुई।

सोनिया गांधी जी के साथ हमेशा सार्थक बातचीत होती है। विभिन्न विषयों पर बात हुई। मैं तो 6 महीने से लगा हूं कि नया अध्यक्ष बनाया जाए। मध्य प्रदेश में नया अध्यक्ष बनना चाहिए, आज भी मैंने ये बात दोहराई।’ वहीं सिंधिया की नाराजगी सबंधित सवाल का जवाब देते हुए कमलनाथ ने कहा, ‘मैं नहीं मानता कि सिंधिया जी किसी भी तरह से नाराज हैं।’ वहीं सिंधिया ने इस बारे में कुछ भी कहने से इंकार कर दिया है।

आपको बता दें कि जब भाजपा को हराकर 15 साल बाद कांग्रेस ने मध्य प्रदेश की सत्ता पर वापसी की थी तब भी मुख्यमंत्री के पद को लेकर सिंधिया और कमलनाथ के नाम आगे आए थे। सिंधिया को मुख्यमंत्री बनाने को लेकर राज्य में उनके समर्थकों ने प्रदर्शन भी किया था लेकिन हाईकमान ने अंत में बाजी कमलनाथ के हाथ में लगी।ज्योतिरादित्य सिंधिया को राहुल गांधी का करीबी माना जाता है। लोकसभा चुनाव में सिंधिया को अपनी पारंपरिक सीट गुना से हार का सामना करना पड़ा था।f

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